यरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग केस में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने गुरुवार को दिल्ली पटियाला कोर्ट में चार्जशीट पेश की। इस मामले में जांच एजेंसी ने कांग्रेस नेता पी चिदंबरम समेत 9 लोगों को आरोपी बनाया है। ईडी ने एयरसेल-मैक्सिस मनी लॉन्ड्रिंग मामले में चिदंबरम पर विदेशी निवेशकों के साथ साजिश रचकर फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी देने का आरोप लगाया। चार्जशीट में कहा गया कि मंजूरी नियमों की अनदेखी करके दी गई। अदालत 26 नवंबर को अगली सुनवाई करेगी।
इससे पहले जून में ईडी ने पी चिदंबरम के बेटे कार्ती चिदंबरम को आरोपी बनाया था। इस मामले में 5 जून को एजेंसी ने पूछताछ के लिए बुलाया था। चिदंबरम के अलावा चार्जशीट में एस भास्करन (कार्ती का सीए), वी श्रीनिवासन (एयरसेल के सीईओ), ए रल्फ मार्शल, एस्ट्रो ऑल एशिया नेटवर्क मलेशिया, एयरसेल टेलिवेन्चर्स लिमिटेड समेत 9 नाम हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने चिदंबरम के खिलाफ कार्रवाई पर रोक लगाई
दिल्ली हाईकोर्ट ने इसी मामले में गुरुवार को पी चिदंबरम की गिरफ्तारी पर लगी रोक को 29 नवंबर तक बढ़ा दी है। हाईकोर्ट ने चिदंबरम की याचिका पर सुनवाई की, जिसमें उन्होंने ईडी और सीबीआई द्वारा उनके खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की थी।
एयरसेल-मैक्सिस कंपनी को लाभ पहुंचाने का आरोप
सीबीआई ने चिदंबरम के खिलाफ 15 मई 2017 को मामला दर्ज किया था। ईडी भी जांच कर रही है।
आरोप हैं कि चिदंबरम ने 2006 में वित्त मंत्री रहते ने एफडीआई के लिए नियमों की अनदेखी कर एयरसेल-मैक्सिस कंपनी को लाभ पहुंचाया।
ईडी का यह केस एफआईपीबी से जुड़ा है। एयरसेल-मैक्सिस डील को पी चिदंबरम ने बतौर वित्त मंत्री 2006 में मंजूरी दी थी।
ईडी का कहना है कि पी चिदंबरम को 600 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट प्रपोजल्स को मंजूरी देने का अधिकार था। इससे ऊपर के प्रोजेक्ट के लिए कैबिनेट कमेटी ऑन इकोनॉमिक अफेयर्स की मंजूरी की जरूरत थी।
यह मामला 3,500 करोड़ रुपए की एफडीआई की मंजूरी का था, इसके बावजूद एयरसेल-मैक्सिस एफडीआई मामले में चिदंबरम ने मंजूरी दी।
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